MEERA BAI JIVAN PRICHYE MEERA BAI KE BAARE GK QUESTION

 दोस्तों आज हम एक और कवि परिचय लेकर आ रहे हैं यह परीक्षा प्रसिद्ध कृष्ण भक्ति मीराबाई का साहित्यिक परिचय है इसको हम अपनी पोस्ट के माध्यम से आप लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे पसंद आए तो लाइक जरुर कर देना तो आपका ज्यादा समय ना लेते हुए शुरू करते हैं|                                                       

                   MEERA   BAI    SAHITIK   PRICHYE                         



  •  जीवन परिचय
  •  निरपेक्ष कृष्ण भक्त कवियों में मीराबाई का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है उनका जन्म सन 1498 में KURDKI  नामक गांव मारवाड़ रियासत राजस्थान में हुआ इनके पिता का नाम राव  रतन सिंह था तथा दादा का नाम राव दूदा था इन्हीं बच्चों ने अपने दादा से कृष्ण भक्ति के संस्कार प्राप्त हो गई थी इनका चचेरा भाई जयमल भी परम भक्त था संत रैदास  दास उनके गुरु माने जाते हैं|  1516 ईस्वी में उनका विवाह राणा सांगा के बड़े पुत्र उदयपुर के महाराणा  कुमार भोजराज जी के साथ हुआ था 7 वर्ष पश्चात ही जब उनके पति की मृत्यु हो गई तब यह तत्कालीन सती ना होकर कृष्ण भक्ति में डूब गई साधु संगति में अपना जीवन व्यतीत करने लगी कृष्ण को अपना पति माना तथा साधु संगति में रहना उनके  देवर राव विक्रम सिंह अनुचित लगता था उन्होंने इनको अनेक प्रकार से यातनाएं दी परंतु भक्ति के प्रभाव सिंह का बाल भी बांका ना हुआ उन्होंने राज परिवार का त्याग कर दिया और अनेक स्थानों की यात्राएं करने के बाद मेड़ता ही आई फिर वृदावन चली गई अतः अपने जीवन के अंतिम दिनों में द्वारिका के रणछोड़ जी के मंदिर में रहने लगी वृंदावन में इनकी बैठ प्रसिद्ध कृष्ण भक्त कवि जीव गोस्वामी से हुई थी ऐसा माना जाता है कि सन 1573 इसमें यह रणछोड़ जी के मंदिर में समाहित हो गई |                                                                                                                             उनकी रचनाएं इस प्रकार हैं
  •  11 रचनाएं मानी जाती है   < गीत गोविंद टीका: नरसी जी रो माहेरो  राग सोरठ के पद मलार  राग मीरा की गरबी  रुकमणी मंगल सत्यभानु रुसन  नरसी मेहता की हुंडी स्फुट > > पद  इन रचनाओं में से केवल स्फुट  पद जो मीरा  पदावली के नाम से प्रकाशित है\  तथा नरसी जी रो माहेरो  की प्रामाणिक मानी जाती है|                                                             
  • साहित्यिक विशेषताएं
  •  मीराबाई साहित्य
  •  की विशेषता अनन्य भाव से कृष्ण की भक्ति है इनकी भक्ति के माधुर्य भाव की प्रधानता है उनकी कविता प्रेम की गंभीर अभिव्यंजना है विरह की वेदना है मिलन का उल्लास भी है काव्य से निकलकर सहज सहज प्रमोछावास  का साकार रूप है इनकी भक्ति भावना प्रमुख रूप से सगुण भक्ति भावना है लेकिन इनके कुछ पद निर्गुण भक्ति भावना से भी प्रभावित है उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से सदा सामाजिक और वैचारिक मंत्रों का विरोध किया और लोक निंदा की परवाह न करते हुए उसी बात पर अमल किया जिस पर उन्होंने विश्वास किया था अपने युग की गुरु रूढ़िग्रस्त  समाज में यह स्त्री मुक्ती की आवाज बनकर उभरी  इनकी                                                                                

 भक्ति भावना 

पद्धति और शास्त्रीय पद्धति दोनों दृष्टियों से सारे युक्त हैं परंतु उसमें शास्त्र पद्धति सिमित  भाव पक्ष सबल है प्रेम भावना मीराबाई के काव्य का मूल स्वर कृष्ण प्रेम है वह कृष्ण से सच्चा प्रेम करती है और विभिन्न नामों से पुकारती है गिरिधर गोपाल नटवर नागर नंदलाल नंद नंदन बांके बिहारी श्याम सुंदर गोविंद आदि सभी नाम कृष्ण के लिए प्रयुक्त हुए हैं यही नहीं वे सच्चे संतों में योग्य द्वारा प्रयुक्त शब्दों का प्रयोग करती है संत मीरा का प्रेम सगुण भक्ति के अंतर्गत आता है उसके आराध्य हैं एवं प्रियतम लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण हैं उनके प्रेम में संयोग और वियोग दोनों पक्ष देखे जा सकते हैं यह तो भगवान श्री कृष्ण के सिवा किसी और अन्य से प्रेम नहीं करना चाहती भक्ति भावना हिंदी के भक्त कवियों में मीरा का स्थान महत्वपूर्ण है लेकिन अन्य कवियों से असमान उनकी भक्ति माधुर्य भाव की भक्ति है कुछ कुछ सूत्रों पर उनकी बुद्धि काम है अन्य भगत कवियों से भी अधिक आगे बढ़ गई है इसका कारण यह है कि मीरा की भक्ति भावना उनके हृदय से निश्चित है स्वभाविक एवं सहज है उन्होंने किसी संप्रदाय विशेष में दीक्षा नहीं ली थी UNKO ACHA LGA  अच्छा लगा गा दिया |                              

  •  गीति तत्व की प्रधानता

 हिंदी की श्रेष्ठ नारी गीतकार कही जा सकती है उनकी विभिन  राग रागनियों में रचित है उनके गीत काव्य में सभी तत्व संगीतात्मक अनुभूति की तीव्रता भावो की एकता संसिप्ता आदि विद्यावान है उनके गीतों में ुनुरागमई तथा विसादमै अनुभूतियाँ  अभिव्यक्ति हुई है कवित्री ने अपने निश्छल हृदय से सुख दुख हर सुख तथा राग विराग को भी बड़ी तन्मयता  के साथ  व्यक्त किया है राग पीलू राग हमीर राग तिलक राग गुजरी राग बिहाग राग  कली होली  रुखन मल्हार का सफल प्रयोग हुआ है                                            

  •  भाषा शैली

 हिंदी काव्य भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है उनकी गुजराती भाषा का विशेष पुट है खड़ी बोली में पंजाबी इनकी कविता में प्रभाव दिखाई देता है इनके पर विभिन्न राग रागनियों पर आधारित है संगति एवं संविधान की दृष्टि से इनका कार्य बहुत ही उच्च कोटि का है माधुर्य गुण की भाषा का प्रमुख गुण है इनकी भाषा अनुसरण भाव प्रधान है इसलिए उनके काव्य में अलंकार का प्रयोग नहीं हुआ फिर भी अनुभूति आदि अलंकार इन की वाणी का अनुसरण करते चले हैं वियोग श्रृंगार इनके काव्य का प्रमुख रस है शांत रस भी उच्च कोटि की अभिव्यक्ति उनके काव्य में हुई है                                                                                                                   

about me 

दोस्तों आज हम मैं ने एक प्रसिद्ध कृष्ण भगतनी मीराबाई का साहित्यिक परिचय के बारे में बताया कुछ गलती हुई हो तो कृपया अपना छोटा भाई  पुत्र समझकर गलती को माफ करना आप अगर हमें हौसला देते हैं तो हम अपना कार्य है जो उसे दिल लगाकर करते हैं इसलिए आप हमें हौसला देते रहिए और यह कवि परिचय पसंद आए तो कृपया लाइक और शेयर जरूर कर दें मैं यह बात एक भारतीय होने के नाते कह रहा हूं जो सच्चा भारतीय होगा वह मेरी फीलिंग जरूर समझेगा धन्यवाद दोस्तों

Comments

Popular posts from this blog

kavi surdaas jivan prichye

भारतीय धर्मों के बारे में basic jankari muslim dharm jain dharm parsi dharm gk se संबंधित जानकारीWHAT IS THE HINDULISM

UNIVERSE KE BAARE ME BRAHMAND KYA HAI BRAHMAND KI KHOJ IN HINDI ब्रह्माण्ड की जानकारी[ हिंदी में ]