नागार्जुन के जीवन के बारे में HINDI PEPAR QUESTION INHINDI GKPDO


  • नमस्कार मैं आप सभी का अपने ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत करता हूं जैसा कि आप जानते हैं कि मैं अपने ब्लॉग पर विक्की से रिलेटेड कुछ ना कुछ पुराना हो या नया एक विद्यार्थी और जो भी एग्जाम की तैयारी करते हैं उनके लिए बिल्कुल हेल्प रहता है आज भी एक कवि के बारे में बताने जा रहा हूं जिस से रिलेटेड किसी भी एग्जाम में एक या दो प्रश्न पूछे जाते हैं और भी जैसे कई तरह के एग्जाम मैं ense related पूछा जाता रहा है |











  • नागार्जुन का जीवन 

वैद्यनाथ मिश्र यात्री हिंदी साहित्य हिंदी के प्रसिद्ध कवि प्रगतिशील कवि एवं कथाकार हैं आधुनिक कवि के रूप में नागार्जुन दाई पसली के घुमंतू जी थे नागार्जुन का जन्म 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के संत लखा गांव में हुआ था इन्होंने अपनी शुरू की शिक्षा स्थानीय संस्कृत पाठशाला में प्राप्त की इसके बाद संस्कृत अध्ययन के लिए बनारस और कोलकाता भी गए थे 1936 में अध्ययन के लिए लंका भी गए और वहां बौद्ध धर्म में दीक्षित हो गए 1938 में स्वदेश वापस आ गए थे नागार्जुन अपनी  घुमक्कड़ फक्कड़पन के लिए प्रसिद्ध रहे थे शिक्षा प्राप्ति के दौरान उनकी भेंट मैथिली के प्रकांड पंडित सीताराम जहां से हुई उसने भाषा छंद अलंकार आदि का बहुत ही ज्ञान था |







जिससे उनको प्राप्त हुआ बनारस में रहते हुए संस्कृत के साथ-साथ मैथिली में भी साहित्य रचना करने लगे 20 वर्ष की आयु में 1931 में उनका विवाह हो चुका था लेकिन अध्ययन घुमक्कड़ी राजनीति रुचि होने के कारण परिवार की देखरेख नहीं कर सके नागार्जुन के चार पुत्र और दो पुत्रियां थी मैथिली समाज में उन्हें समुचित आदर नहीं मिला क्योंकि एक तो समुंदर पार की यात्रा कर आए थे दूसरा सन्यास भ्रष्ट थे और तीसरे बौद्ध होने के कारण खानपान की पवित्रता और नष्ट हो गई थी 1941 में वह घर लौट आए थे लगभग 5 दशक तक नागार्जुन हिंदी साहित्य को समृद्ध करते रहे महाशय नवंबर 1998 को उनका देहांत हो गया था उनकी कुछ प्रमुख

  • साहित्य रचनाएं


 नागार्जुन 1935 में हिंदी के मासिक दीपक में काम किया 94243 विश्व बंधु साप्ताहिक संपादन किया अपनी मातृभाषा मैथिली में यात्री उपनाम से रचना करते थे और उनकी कविता संग्रह चित्रों से मैथिली में नवीन भाव बौद्ध का प्रारंभ माना जाता है संस्कृत में चाणक्य उपनाम से कविताएं लिखी थी 1930  लेखन करते हुए surdas ke baare me janne ke liye नागार्जुन लेकिन करते हुए निम्नलिखित रचनाओं की सतरंगे पंखों वाली" प्यासी पथराई आंखें युगधारा तालाब की मछलियां हजार-हजार बाहों वाली तुमने कहा था पुरानी जूतियों का कोरस आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने वैसे हम भी क्या ऐसे तुम भी क्या पका कटहल आधी रचनाएं की नागार्जुन उपन्यासों में भी बलचनमा रतिनाथ की चाची कुंभीपाक उग्रतारा नामक साहित्य उपन्यास लिखे संपूर्ण साहित्य 7 खंडों में प्रकाशित हो चुका है था |


  • काव्य सौंदर्य



नागार्जुन की कविता राष्ट्रीय चेतना कविता है जिसमें राष्ट्रीय आंदोलन की धड़कन सुनाई पड़ती है क्योंकि व्यंग्यात्मक कविता का अभिन्न अंग है प्यासी  पथराई आंखें फाहियान वंशीधर आदि कविताएं राष्ट्रीय भाव से ओतप्रोत है


  • काव्य भाषा



नागार्जुन की काव्य भाषा बाबू का अनुसरण करती है तत्सम शब्दावली के साथ-साथ तद्भव देशज विदेशी शब्द आवश्यकता अनुसार उपयुक्त हुए हैं मुहावरों का उचित प्रयोग उनकी काव्य की विशेषता है नागार्जुन मधुर गीत लिखे हैं और मुक्त छंद में भी काव्य रचना की है प्राणायाम प्रकृति राजनीति और देश प्रेम पर कविताएं लिखी है उनकी क विताएं दिल पर चोट करने वाली है कर्तव्य की याद दिला ने वाली है और राह दिखाने वाली भी
nelson mandela ke baare me



यह कभी अदभुत था क्योंकि कवि के विवेक पर किसी तरह का बंधन स्वीकार नहीं करता था नागार्जुन मानते थे क्योंकि पार्टी देश समाज से बड़ी नहीं होती इसलिए ठुकरा दिया 1962  मैं उन्होंने चीन विरोधी कविता लिखी 1965 में आपातकाल विरोधी कविताएं लिखी जयप्रकाश आंदोलन का खुलकर साथ दिया नागार्जुन कोमल भाव के कवि  बीते जब सन्यासी जीवन काटकर बरसों बाद   ग्रह जीवन बिताया पत्नी की उम्र ढल चुकी थी उनकी पीड़ा पर कविताएं लिखी उनकी पत्नी की दशा पर लिखा 

  साथियों आज हमने नागार्जुन के बारे में बताया अगर गलती से कहीं भी कोई भी गलत लिखा गया हो तो उसके लिए मैं माफी चाहूंगा आप सभी का हमारे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद आपका दिन शुभ हो  आगे भी GK से रिलेटेड पोस्ट डालता रहूंगा यदि पोस्ट पसंद आई तो लाइक कमेंट और शेयर जरूर करें इससे मेरा हौसला बढ़ता रहेगा धन्यवाद |    

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