कवि देवदत्त के जीवन के बारे में DEVDUTT KE JIVAN KE BAARE ME HINDI ME

लो नमस्कार दोस्तों हम अपने इस ब्लॉग पर GK से रिलेटेड जानकारी अपडेट करते रहते हैं जिससे आने वाले एग्जाम में बच्चों की हेल्प हो सके और क्योंकि GK का महत्व बहुत ही अधिक माना जाता है अब किसी भी एग्जाम की तैयारी करते हो तो आपको इसकी जानकारी पहले ही होगी आज हम एक और कवि परिचय लेकर आपके सामने आए हैं उस कवि का नाम है | 









    JIVAN PRICHYE

  • तिकाल के कवि माने जाते हैं उनका पूरा नाम देवदत्त द्विवेदी था पूर्व है उत्तर प्रदेश में इटावा में सन 1673 ईसवी मैं उनका जन्म हुआ था जय एक ब्राह्मण थे उन्होंने स्वयं अपने बारे में लिखा है दमोह सरिया कवि देव को  नगर ईटा वह वास उन्होंने अपने जीवन काल में अनेक आशीर्वाद दाताओं के पास भटकना पड़ा था औरंगजेब के पुत्र आलम शाह के दरबार में अभी कुछ समय तक रहे थे पर उन्हें वहां पर संतोष नहीं मिला सुख भोगीलाल नामक आश्रयदाता से प्राप्त हुआ था उतना किसी और से नहीं मिल सका उनका देहांत 1767  ईसवी में हुआ था उनकी रचनाएं इस प्रकार है देवर के द्वारा रचित ग्रंथों की निश्चित संख्या अभी तक ज्ञात नहीं हो सकी है कुछ विद्वान इनके ग्रंथों की संख्या 52 मानते हैं तो किसी और ने बेहतर स्वीकार की है रामस्वरूप मेन की संख्या 25 मई है इन ग्रंथों की संख्या अनिश्चित होने के कारण अपनी पुरानी रचनाओं में ही जोड़कर एक नया ग्रंथ तैयार कर देते थे उनकी प्रमुख रचनाएं हैं |

भाव विलास रस काव्य रसायन भवानी विलास अष्टयाम प्रेम तरंग सुख सागर तरंग देव माया शब्द रसायन

साहित्यिक विशेषताएं





देव की कविता का प्रमुख विषय सिंगार ही था राधा कृष्ण के माध्यम से सिंगार भावनाओं को प्रकट किया है संयोग श्रृंगार की रचना करनी अधिक अच्छी लगती है वियोग श्रृंगार में उन्होंने अपनी भावना का वर्णन किया है यह शरीर और शारीरिक क्रियाओं को माया का बंधन मानते हैं इन संसार में कोई मुझसे बच नहीं सकता जैन का कथन था इसलिए क्षणभंगुरता देखकर उनके प्रति ग्लानि उत्पन्न होती है देव नहीं आचार्य कर्म को पूरा किया था और शब्द रसायन के द्वारा काव्य की विभिन्न विशेष विशेषताओं का चित्रण किया था उनके कमरे में दार्शनिकता के दर्शन बार-बार होते हैं यह ब्राह्मण को एक और सर्वव्यापक मानते हैं इनका ना तो आरंभ है और ना अंत है निर्गुण भी है और सगुण भी है उसका वर्णन तो वह भी नहीं कर पाते|








देवकरण प्रकृति का सुंदर चित्रण किया है उनकी कविताओं में दरबारी संस्कृति का अधिक चित्रण हुआ है प्रेम और सौंदर्य की शहर चित्र खींचे देव ने अपनी कविता बृज भाषा में रचित थी उन्होंने अनुप्रास अलंकार का भी विशेष मुंह था उन्होंने शब्द शक्तियां कक्षा प्रयोग किया संधि योजना में लिया और दुकानों ने विशेष ध्यान रखा देवस्थान बहुत अच्छी भाषा की लिपि थी |




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http://gkpdo.blogspot.in/2018/02/kavi-surdaas-jivan-prichye.html




और कवि परिचय देखने के लिए हमारी पिछली पोस्ट को देखें ताकि आपकी तैयारी पूर्ण रुप से हो सके मैं यही आशा करता हूं कि आप को यह पोस्टर अच्छी लगी होगी अच्छी लगे तो इसे शेयर करें ताकि हमारा हौसला 
बढ़ता रहे और आगे भी इसी तरह की पोस्ट डालता रहूंगा धन्यवाद दोस्तों |

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